हम और हमारा पाचन
आज के इस दौर में बहुत से लोगों में यह परेशानी देखी जाती है कि उनका पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता उन्हें ठीक से भूख नहीं लगती हर समय पेट भरा भरा महसूस होता है या फिर वह जो कुछ भी खाते हैं वह ठीक से डाइजेस्ट नहीं होता ऐसे में वह पाचन और पेट क्लीन करने की तरह तरह की दवाइयां लेते हैं लेकिन यह प्रॉब्लम ऐसी सीरियस नहीं है जिसे दूर करना संभव न हो अगर खान पीन को लेकर थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो अपच और कमजोर पाचन तंत्र की प्रॉब्लम को काफी हद तक दूर किया जा सकता है आमतौर पर गैस पेट फूलना भोजन न पचना पेट दर्द और दस्त जैसे लक्षण देखे जाते हैं आयुर्वेद के अनुसार खराब पाचन मुख्य रूप से पाचन प्रणाली में कम अग्नि की वजह से होता है बेहतर पाचन के लिए आयुर्वेद में बहुत से उपाय बताए गए हैं आयुर्वेद में पाचन प्रक्रिया को तेजस पूजा और प्राण की अच्छी गुणवत्ता के डेवलपमेंट के लिए इंपोर्टेंट माना जाता है जो अशुद्ध पदार्थों को अलग करके बाहर निकालते हैं।
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पाचन शक्ति कमजोर होने के लक्षण
पाचन शक्ति कमजोर होने से सीने में जलन महसूस होती है कब भूख कम लगती है थकावट महसूस होती है भोजन के बाद एसएस महसूस होती है लैट्रिन करने में परेशानी होती है पेट के ऊपर हिस्से में सूजन आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण
पाचन शक्ति कमजोर होना या भोजन अच्छे से नए पचना इसके बहुत से कारण हो सकते हैं उनमें मुख्य रूप से दिल्ली कामकाज की टेंशन अनहेल्दी फूड भोजन खाने और सोने का कोई सही समय नहीं होना बहुत अधिक खाना या चलते-फिरते खाना हमारे खराब पाचन तंत्र का कारण बनता है वीक पाचन तंत्र के सामान्य कारण है ज्यादा खाना या जल्दी-जल्दी खाना वसायुक्त चिकना या मसालेदार भोजन बहुत अधिक कैफ़ीन शराब चॉकलेट या कार्बोहाइड्रेट पदार्थ लेना धूम्रपान तनाव हाथ में रक्त का प्रवाह कम होना आदि।
पाचन तंत्र को ठीक करने के उपाय
अपने भोजन में कुछ चीजों को रेगुलर यूज करने से पाचन तंत्र को स्ट्रांग करने में हेल्प मिलती है इसके लिए आयुर्वेदिक औषधि साइंस और वैदिक चिकित्सा में बड़े पैमाने पर धनिया का यूज किया जाता है धनिया के बीज की तासीर ठंडी होती है यह शरीर में एक्स्ट्रा गर्मी और एसिड को ठंडा करता है और हमारे पाचन तंत्र से गैस को खत्म करता है जीरा भी इसमें काफी हेल्पफुल साबित होता है। जीरा पाचन को बढ़ाता है और गैस जी मिचलाना और पेट की जलन को कम करता है इसी तरह अच्छे पाचन के लिए आयुर्वेद में अदरक का यूज खूब किया जाता है यह कम हुई जठराग्नि और स्वस्थ पाचन एंजाइमों की शराब को इनक्रीस करता है यह विशेष रूप से मछली पेट फूलना हिचकी और एसिड रिफ्लक्स को कम करने के लिए उपयोगी है पाचन शक्ति बढ़ाने में सौंफ का सेवन बहुत हेल्प साबित होता है सौंफ बिना पित्त को बढ़ाएं जट रागनी को बढ़ाने में विशेष रूप से प्रभावी है इसी तरह आंवला भी पेट के लिए काफी असरकारक है आंवला पाउडर को एक कप पानी में मिलाएं और खाली पेट इसका यूज करें स्ट्रांग पाचन शक्ति के लिए यह बहुत ही अच्छा आयुर्वेदिक उपचार है एलोवेरा भी पाचन शक्ति को मजबूत करता है इसके सेवन से सभी तरह के पाचन रिलेटेड रोग दूर हो जाते हैं जिसमें पेट का अल्सर भी शामिल है स्ट्रांग पाचन तंत्र के लिए त्रिफला त्रिफला में आंवला हरड़ और बहेड़ा का इस्तेमाल करना चाहिए एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन खाली पेट करने से बहुत फायदा होता है इसके अलावा कुछ एक्सरसाइज भी इसमें हेल्प साबित होती है सूर्य नमस्कार कटिचक्रासन भुजंगासन धनुरासन वज्रासन सेतुबंधासन पवनमुक्तासन आदि इसमें काफी हेल्प साबित होते हैं ।
भोजन दुरुस्त
आयुर्वेद के अनुसार भोजन नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि यह पाचन की प्रक्रिया को खराब करता है पर्याप्त दोपहर का भोजन और रात में हल्का भोजन करना चाहिए इससे जठराग्नि को सही रखने के लिए अच्छा ये होगा की जैसे ही सो कर उठो तो एक कप गर्म पानी में एक बड़ा चम्मच नींबू का रस घोलकर पिए इससे पाचन तंत्र साफ होने में काफी हद तक मदद मिलेगी। दिन में बहुत सारा पानी पिए लेकिन भोजन के साथ पानी या पे पदार्थों का इस्तेमाल लिमिट में रखें बर्फ वाले कार्बोनेटेड या कैफीन युक्त पेय पदार्थ ले ले और भोजन के साथ शराब और दूध का सेवन करने से बचे रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध लेना आपके पाचन को दुरुस्त रखेगा भोजन समय पर करें रोजाना लगभग एक ही समय पर खाए सोने और जागने का समय फिक्स करें और daily एक्सरसाइज भी करें ,दूध के साथ मां से मछली नहीं लेनी चाहिए शहद को कभी भी गर्म करना है पकाना नहीं चाहिए।
आज की इस पोस्ट में जो भी हमने आपको जानकारी बताई है वह सिर्फ सामान्य जानकारी है और जागरूकता के लिए है उपचार या स्वास्थ्य संबंधित सलाह के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की मदद ले।


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