बहादुर प्रताप जादूगरों के देश में जाकर किया अनोखा काम

 राजा ने जैसे ही वह पानी अपनी बेटी को पिलाया तो राजकुमारी अपने आप बोलो कि मेरी आंखें ठीक हो गई अब मुझे दर्द नहीं हो रहा है मैं ठीक हो गई हूं लड़की खुशी से नाचने लगी राजा ने प्रताप की बड़ी ही प्रशंसा की जादूगरों के देश में दूसरा जादूगर यह तो आश्चर्य की बात थी अपनी बेटी को ठीक होते देखकर राजा ने प्रताप को अपने पेट का रोग भी बताया कि मैं पिछले कई सालों से पेट के रोग से दुखी हूं आप खाना कैसे खाते हो प्रताप ने पूछा हम सब लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं तो ठीक है आज रात के खाने पर मैं भी आपके पास बैठूंगा ठीक है आप भी आए और हमारे साथ खाना खाए उसी रात सब लोग एक साथ खाना खाने पर बैठ गए प्रताप ने देखा उनके आगे कई प्रकार के भोजन मेज पर सजा कर रखे गए थे बादशाह खाना शुरू करने लगा तो प्रताप ने कहा ठहरो राजा का हाथ वहीं रुक गया पिता अपनी मां से भरे बर्तन का ढक्कन उठाया और उसे सब लोगों ने बड़े ध्यान से देखा देखने के बाद उसे फिर ढक्कन से ढक दिया थोड़ी देर के बाद उसे फिर उठा दिया गया तो उस बर्तन में कीड़े ही कीड़े भरे पड़े थे। 

magical kingdom and brave pratap



सब ने आश्चर्य से उसे देखा प्रताप ने राजा से कहा आपने जो खाने के बर्तन में कीड़े देखे हैं यह सब उस नजर का फल है जो आप सब लोगों के सामने खाना खाते हो आज के बाद आप निर्णय कर ले कि आप जब कभी भी भोजन करेंगे तो केवल अकेले में प्रताप के बाद उसके मन को भी भाग गई तब राजा ने उसे बड़े सम्मान से अपने पास बैठाया और गले से लगाया और  बोले तुम हमारे खास मेहमान हो हमारे खजाने से कुछ भी मांग सकते हो हम खुशी से तुम्हें देंगे इस गुफा में आप पहले मानव हो जो जीवित बच कर जाओगे केवल जीवित ही नहीं प्रताप ने कहा महाराज आपका आशीर्वाद ही मेरे लिए सब कुछ है बल्कि हमारा मनजीत कर जा रहे हो और कुछ नए सही तो तुम जाते समय एक उपहार तो हमारी ओर से ले जाओ हम लोगों के दिल तुमने जीत लिए यह कहते हुए राजा ने अपने गले में पहना मोतियों का हार उसको उपहार के रूप में दे दिया अब आप मुझे अपने देश भेजने का प्रबंध भी कर दें तो आपकी अति कृपा होगी क्यों नहीं राजा ने उसी समय एक काले देव को बुलाकर कहा कि हमारे मेहमान को इसी समय इसके घर तक पहुंचा कराओ काला देव प्रताप को अपनी पीठ पर बैठाकर उड़ता हुआ उसके घर छोड़ आया प्रताप सिंह अपने पिता के पास जाकर उनसे उस रहस्य में गुफा की पूरी कहानी सुना रहा था निर्माण के लिए उसने मोतियों का हार राजा को दिखाया तो वह अपने बेटे के  की बहादुरी की प्रशंसा करने लगे कहने लगे बेटा तुमने बहुत ही अच्छा काम किया और  उसकी गुफा से  तुम जिंदा लौट आए वह भी अपने आप में काबिले तारीफ है आज तक जो भी उस गुफा में गया है कोई जिंदा वापस नहीं आया है फक्र है हम सभी को तुम्हारी बहादुरी और चतुराई  पर। 


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