बेटे की सफलता से बाप को बहुत खुशी हुई थी लेकिन अभी उसने केवल पहली परीक्षा ही पास की थी अभी उसकी दो परीक्षाएं बाकी थी उधर राजकुमार प्रताप सिंह राजकुमारी सत्यवती से मिला तो उसने उसके भी पहले प्रश्न का उत्तर दे दिया तो वह बहुत खुश हुई असल में वह राजकुमार से प्रेम करने लगी थी वह मन से यही चाहती थी कि राजकुमार अपनी परीक्षा में सफल हो जाए जिससे उसकी बुद्धि और शक्ति का पता चल सके और राजकुमार के सामने दूसरा प्रसन्न था एक ऐसी रहस्य में आवाज जो केवल मंगलवार को ही सुनाई देती है जिसके कारण गांव ज्वालापुर के सब लोग हर समय ही डरे रहते थे उन गांव वासियों के डर का सबसे बड़ा कारण यही था कि उसे जो भी सुनता था उसका पूरा शरीर कांपने लगता था कुछ लोग तो ऐसे डर गए थे कि पागल होकर अपने घर छोड़कर भाग गए थे प्रताप सिंह ऐसी घटनाओं के लिए ही घर से निकला था ।
एक गांव से दूसरे दूसरे से तीसरे तीसरे से चौथे गांव जंगलों नदियों नालों को पार करता हुआ वह एक ऐसे गांव में जा पहुंचा जिस गांव के सब लोग इकट्ठा होकर रो रहे थे प्रताप ने उन लोगों के पास जाकर पहुंचा भाई लोगों आप सारे के सारे इस प्रकार क्यों रो रहे हो उनमें से एक आदमी ने उठ कर रोते रोते कहना स्टार्ट किया भैया क्या बताएं हमारे गांव में मंगलवार के दिन पहले तो तेज आंधी आती है फिर काले बादल और उसके बाद एक भूत आता है जो गांव के किसी ने किसी आदमी की हत्या कर कर उसे खा जाता है हमारे गांव वालों ने मिलकर यह निर्णय किया था कि हम अपनी इच्छा से मंगलवार को किसी भी एक प्राणी को स्वयं ही भूत के हवाले कर देंगे इससे केवल एक ही आदमी को उसका डर सताएगा बाकी तो चैन की नींद सोएंगे आज हमारे गांव के सरदार के बेटे का नंबर आ गया है दुख तो इस बात का है कि सरदार का वह अकेला बैठा है उनके वंश का तो विश्वास हो जाएगा बस इतनी सी बात के लिए पूरा गांव रो रहा है हां तो फिर आप सब लोग रोना-धोना बंद करो आप उस बच्चे को बचा सकते हैं सारे गांव वाले आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगे वह कैसे मुझसे कुछ भी मत पूछो अब मैं आप लोगों को जो कुछ भी कहता जाऊं वही करते जाए ठीक है आप हुकुम करो देखो सबसे पहले मुझे एक बहुत बड़ा शीशा लाकर दो उसे उस स्थान पर लगवा दो जिधर से वह भूत आता है ठीक है बंधु ऐसा ही होगा गांव का मुखिया सरदार अपने बच्चे को बचाने के लिए पूरी भागदौड़ कर रहा था उसने झट से एक बहुत बड़ा शीशे का प्रबंध किया और उसे उसी स्थान पर लगवा दिया जिधर से भूत आया करता था उस शीशे को एक कपड़े से ढककर प्रताप सिंह उसके पीछे छिप गया आधी रात को प्रताप के कानों में बड़ी भयंकर आवाज सुनाई दी जो राक्षस की आवाज थी राक्षस की आवाज से पूरा वातावरण वह एक अजीब सी गूंज सुनाई दे रही थी सभी को एक अजीब सा डर सता रहा था।

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