घर का वैद्य – अपनी बीमारी, अपना इलाज

हमारे गाँव-देहात में एक कहावत बहुत मशहूर है – “रसोई ही सबसे बड़ी दवा की दुकान है।” पुराने समय में जब बड़े-बड़े अस्पताल नहीं होते थे, न महँगी दवाइयाँ, तब लोग अपने घर की चीज़ों से ही छोटे-मोटे रोगों का उपचार कर लेते थे। दादी-नानी के पास हर बीमारी का कोई न कोई देसी नुस्खा जरूर होता था। आज भी इन घरेलू उपायों की महत्ता कम नहीं हुई है, बस समझदारी के साथ अपनाने की जरूरत है। नीचे दिए गए नुस्खे परंपरागत अनुभवों पर आधारित हैं। कोई भी गंभीर, पुराना या जानलेवा रोग हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।

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कब्ज (पेट साफ न होना)

पेट का साफ रहना सबसे बड़ी दवा माना जाता है। अगर पेट ठीक है तो आधी बीमारियाँ अपने आप दूर रहती हैं। साधारण कब्ज के लिए रात को सोते समय दस-बारह मुनक्के लें, उनके बीज निकाल दें और दूध में उबाल लें। पहले मुनक्के खाएँ, फिर ऊपर से वही दूध पी लें। सुबह पेट खुलकर साफ होगा। यदि कब्ज ज्यादा परेशान कर रही हो तो तीन दिन लगातार यह प्रयोग करें।

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घर का वैद्य – अपनी बीमारी, अपना इलाज


अगर कब्ज पुरानी और जिद्दी हो गई हो तो सुबह खाली पेट दो ताजे संतरे का रस पिएँ। ध्यान रहे रस में नमक, मसाला या बर्फ न डालें। आठ-दस दिन में पेट की पुरानी जकड़न ढीली पड़ने लगेगी।

एक और आजमाया हुआ उपाय है त्रिफला चूर्ण। लगभग छह ग्राम त्रिफला गुनगुने दूध के साथ रात को लें। धीरे-धीरे आँतों की सफाई होने लगती है और कब्ज की शिकायत कम होती है।


कब्ज क्यों बिगाड़ देती है हाल

अगर पेट साफ नहीं होगा तो आदमी दिन भर भारी-भारी महसूस करेगा। मुँह कड़वा रहेगा, सिर दर्द करेगा, मन चिड़चिड़ा रहेगा। इसलिए कहा जाता है – पेट साफ तो तन साफ।


मुनक्का वाला आसान उपाय

रात को दस-बारह मुनक्के के बीज निकालकर दूध में उबाल लो। पहले मुनक्के खाओ, फिर ऊपर से वही दूध पी लो। सुबह आराम से शौच होगा। तीन दिन लगातार कर लो तो पुरानी अटकन भी ढीली पड़ जाती है।

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संतरे का सादा रस

सुबह खाली पेट दो संतरे का रस पी लो। कोई नमक-मसाला नहीं डालना। आठ-दस दिन में फर्क दिखेगा। साथ में दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहो।


त्रिफला का सहारा

छह ग्राम त्रिफला गुनगुने दूध के साथ रात को ले लो। धीरे-धीरे आँतों की सफाई सुधरती है।


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तुलसी का दम

तुलसी को यूँ ही पूजा नहीं जाता। दस-पंद्रह पत्ते और आठ-दस काली मिर्च उबालकर काढ़ा बना लो। सुबह-शाम पियो। गला खुलेगा, कफ ढीला होगा, बदन हल्का लगेगा।

गला बैठ गया तो

एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक डालकर गरारे करो। रात को चार-पाँच काली मिर्च चबा लो। सुबह आवाज पहले से साफ लगेगी।

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डायबिटीज में अनुशासन जरूरी

डायबिटीज मजाक नहीं है। मीठा कम करो, पेट पर काबू रखो, रोज सुबह-शाम टहलना शुरू करो। करेला की सब्जी खाओ, जामुन के पत्ते चबाओ। जामुन की गुठली सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर आधा चम्मच पानी के साथ इक्कीस दिन लो। पर जांच कराते रहो, लापरवाही मत करो।

हाई बीपी का देसी तरीका

नमक कम कर दो। गुस्सा कम कर दो। रोज पसीना बहाओ। तरबूज, गाजर जैसे हल्के फल खाओ। दिमाग शांत रखो।

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गाजर का रस थोड़ा शहद मिलाकर पियो। भूखे मत रहो। पानी भरपूर पियो।


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झाइयाँ और दाग

रीठे का छिलका पानी में पीसकर लगाओ। शहद और कच्चा दूध मिलाकर पाँच मिनट का लेप करो। लेकिन मुहांसे मत नोचो, वरना दाग पक्का हो जाएगा।


दाद की परेशानी

तुलसी के पत्ते पीसकर लगाओ। जगह साफ रखो। अगर बढ़ रहा हो तो डॉक्टर की दवा जरूर लो।


जलना, नकसीर और छोटी आपात स्थिति

जल गया तो क्या करें

सबसे पहले जली जगह को ठंडे पानी में रखो। घबराओ मत। हल्की जलन में कच्चा आलू पीसकर लगा सकते हो। गहरी जलन में सीधा अस्पताल जाओ।

नाक से खून

नींबू की दो-तीन बूंद नाक में डालो। सिर पर ठंडा पानी डालो। बार-बार हो तो जांच जरूरी है।

रूसी

रीठा रात में पानी में भिगो दो। सुबह उसी पानी से सिर धो लो। खुश्की कम होगी।

सफेद बाल

काली मेहंदी लगाकर सुबह धो लो। धीरे-धीरे रंग चढ़ेगा।

आँख, ऐंठन और छोटी तकलीफें

हरड़ को रात में पानी में भिगो दो। सुबह उसी पानी से आँख धो लो। हल्की ठंडक और आराम मिलेगा।

हाथ-पैर की ऐंठन

अखरोट के तेल की मालिश करो। शरीर में पानी की कमी मत होने दो।

आखिरी बात – देसी रहो, पर समझदार भी

घर के नुस्खे छोटे-मोटे रोग में काम आ सकते हैं, लेकिन हर बीमारी का इलाज सिर्फ यही नहीं है। जहाँ जरूरत हो, डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। असली इलाज है – समय पर खाना, सादा भोजन, रोज चलना-फिरना और मन को शांत रखना।

देसी ज्ञान हमारी जड़ है। अगर हम इसे समझदारी से अपनाएँ तो दवा की जरूरत आधी रह जाएगी। शरीर को मशीन मत समझो, इसे संभालो। यही असली घर का वैद्य है – जो पहले जीवन ठीक करना सिखाता है, फिर बीमारी भागती है।

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